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अर्जुन उवाच

 

संन्यासस्य महाबाहो तत्त्वमिच्छामि वेदितुम्।

 

त्यागस्य च हृषीकेश पृथक्केशिनिषूदन

।।18.1।। अर्जुन बोले -- हे महाबाहो ! हे हृषीकेश ! हे केशिनिषूदन ! मैं  संन्यास और त्यागका तत्त्व अलग-अलग जानना चाहता हूँ।
Bhagavad Gita 18.1
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