ॐ
अद्वेष्टा सर्वभूतानां मैत्रः करुण एव च।निर्ममो निरहङ्कारः समदुःखसुखः क्षमी
।।12.13।।सब प्राणियोंमें द्वेषभावसे रहित, सबका मित्र (प्रेमी) और दयालु, ममतारहित, अहंकाररहित, सुखदुःखकी प्राप्तिमें सम, क्षमाशील, निरन्तर सन्तुष्ट, योगी, शरीरको वशमें किये हुए, दृढ़ निश्चयवाला? मेरेमें अर्पित मनबुद्धिवाला जो मेरा भक्त है, वह मेरेको प्रिय है।
Bhagavad Gita 12.13
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