Bhagavad Gita

8.7

तस्मात्सर्वेषु कालेषु मामनुस्मर युध्य च।
मय्यर्पितमनोबुद्धिर्मामेवैष्यस्यसंशयम्।।8.7।।

tasmāt sarveṣhu kāleṣhu mām anusmara yudhya cha
mayyarpita-mano-buddhir mām evaiṣhyasyasanśhayam

Word Meanings

Word Meaning
tasmāt therefore
sarveṣhu in all
kāleṣhu times
mām me
anusmara remember
yudhya fight
cha and
mayi to me
arpita surrender
manaḥ mind
buddhiḥ intellect
mām to me
eva surely
eṣhyasi you shall attain
asanśhayaḥ without a doubt

Translation

।।8.7।। इसलिये तू सब समयमें मेरा स्मरण कर और युद्ध भी कर। मेरेमें मन और बुद्धि अर्पित करनेवाला तू निःसन्देह मेरेको ही प्राप्त होगा।

Commentary

।।8.7।। व्याख्या --'तस्मात्सर्वेषु कालेषु मामनुस्मर युध्य च'--यहाँ 'सर्वेषु कालेषु' पदोंका सम्बन्ध केवल स्मरणसे ही है युद्धसे नहीं क्योंकि युद्ध सब समयमें निरन्तर हो ही नहीं सकता। कोई भी क्रिया निरन्तर नहीं हो सकती प्रत्युत समयसमयपर ही हो सकती है। कारण कि प्रत्येक क्रियाका आरम्भ और समाप्ति होती है -- यह बात सबके अनुभवकी है। परन्तु भगवत्प्राप्तिका उद्देश्य होनेसे भगवान्का स्मरण सब समयमें होता है क्योंकि उद्देश्यकी जागृति हरदम रहती है।सब समयमें स्मरण करनेके लिये कहनेका तात्पर्य है कि प्रत्येक कार्यमें समयका विभाग होता है जैसे -- यह समय सोनेका और यह समय जगनेका है यह समय नित्यकर्मका है यह समय जीविकाके लिये कामधंधा करनेका है यह समय भोजनका है आदिआदि। परन्तु भगवान्के स्मरणमें समयका विभाग नहीं होना चाहिये। भगवान्को तो सब समयमें ही याद रखना चाहिये।,